लापरवाही के गंभीर परिणाम

लेख लेख(कहानी)
मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है और सभी जीवो एवं पर्यावरण का रक्षक भी, लेकिन विकास की अत्यधिक चाहत ने मनुष्य को लापरवाह बनाता गया।वह न तो पर्यावरण का ख्याल रख पाया, न ही जीव का इस गलती ने उसे खुद का दुश्मन बना डाला ।इस असंतुलन की स्थिति में नाना प्रकार के रोग आते गये और मनुष्य लड़ता रहा विज्ञान के बल पर लेकिन मौजूदा हालात में जब विज्ञान ने हाथ खड़े कर दिए है और कोई ठोस  समाधान नही निकल पाया तो आज लापरवाही के वो सारे मंजर याद आने लगे हैं।
यह जो मौजूदा हालात है वह इतना भयावह नहीं होता अगर लोग अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाते।इस वायरस की शूरूआती कहानी ही लापरवाही से शूरू हुई सच छिपाया गया जो इटली अमेरिका स्पेन जैसे शक्तिशाली देशो को विवश कर दिया है।भारत ने कुछ सावधानियाँ बरतकर इसे कम करने की कोशिश जरूर की है लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि इसे भी उल्टे चश्मे से देखा जाने लगा है।आखिर हम इतने लापरवाह क्यो हो गये है? न स्वास्थ की परवाह न आने वाले कल की चिंता केवल वर्तमान हसीं हो यह स्वार्थ के सिवा कुछ नहीं फिर तो यह वायरस से जंग कैसे जीती जायेगी,? यह एक बुनियादी सवाल है जो आज विश्व के हर नागरिक के मन में उठ रहा है? जिसका जवाब भी स्वंय उसी के पास है जिसे वह करना नही चाहता।
आज दवा से ज्यादा स्वंय की हिफाजत की बात की जा रही है।सामाजिक दूरी की बात हो रही है।हाथ धोने की बात हो रही है।लेकिन यह सब तो आदि मानव काल में ही हमारे पूर्वजो ने संस्कार स्वरूप दिया था ऋषि मनीषियों ने सोशल दूरी की बात कही थी स्वच्छता सफाई हाथ धोने की परम्परा कोई नई चीज नहीं लेकिन हम सब ने इसे मनुबाद ब्राह्मणबाद से जोड़कर खुद ही नष्ट कर डाला।प्रकृति से अगाढ़ प्रेम,  जीव-जन्तु पर दया का भाव सभी आदि काल की परम्परायें रही है,  जिससे  मुँह मोड़ना नष्ट करना हमारी लापरवाही का परिणाम है।
हमारे पूर्वजो ने सामाजिक दूरी का निर्वह्न करने के ही उद्देश्य से मनुष्य को चार वर्गो में विभाजित कर सभी के कार्य निर्धारित किये थे,  ताकि प्रकृति और प्रवृति का संरक्षण हो लेकिन हमलोगो ने व्यक्ति-व्यक्ति के अंदर घृणित और अहंकारी सोच पैदाकर उसे पृथक मानसिकता में परिवर्तित कर दिया जहाँ सिर्फ विलासिता पलती है।ऐसे में हम एक लापरवाह नागरिक के अलावा कुछ नहीं जिसे अपनी संस्कृति ही प्यारी न हो वह भला देश और प्रकृति का दायित्व कैसे निर्वहन कर सकता है।
                                    आशुतोष
                                  पटना बिहार

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